- News

WHAT IS SUPER RICH TAX

भारत जैसे देश में जहाँ आर्थिक असमानता विकराल रूप में व्याप्त है,वहाँ covid 19 से उत्पन्न अर्थिक मंदी अधिक तबाही मचाएगी भारत सरकार की आमदनी कम हो गयी है,कुछ reports के अनुसार GST collection में 80 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

अब जब सरकार की आमदनी ही नहीं होगी तो वो अपने खर्चे कहाँ से करेगी,इसलिए सरकार ने कुछ कदम उठाये हैं जैसे सरकारी कर्मचारियों के DA बढ़ोतरी पर रोक,सांसदो के वेतन वो भत्तों में कटौती,वैसे उनका target 30 प्रतिशत की कमी लाना है।

मेरे अनुसार ये उचित भी है,परंतु जो लोग हमारे देश के अधिकतर संसाधनों पर विराजमान है क्या उनपर अतिरिक्त tax नहीं लगाया जा सकता या लगना चाहिए?

2019 OXFAM INDIA के DATA के अनुसार भारत के 1% अमीर लोगो की की कमाई 39% तक बढ़ी है । वहीं गरीब लोगों की एसेट्स में केवल 3% की बढ़ोतरी हुई  है,साथ ही भारत के 9 सबसे अमीर लोगो के पास बाकी 50% जनसंख्या के बराबर की संपत्ति है।

2019 की हमारी राष्ट्रिय आय में केवल 1 percent लोगों का share 70 प्रतिशत से अधिक था इसलिए अब बहुत से लोग सुपर rich tax की माँग करने लगे हैं!

ताजा उदाहरण कुछ IRS (INDIAN REVENUE SERVICES) के अधिकारीयों ने एक perposal बना के भेजा है,आईये उसके बारे में जानते हैं!

कुछ कर अधिकारीयों का PROPOSAL

वरिष्ठ कर अधिकारियों के एक समूह ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों में मदद के लिए अति-धनाढ्यों यानी सुपर रिच करदाताओं पर 40 फीसदी कर लगाने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही विदेशी कंपनियों पर भी ऊंची दर से शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है. अधिकारियों ने अल्पकालिक उपायों के तौर पर सरकार को ये सुझाव दिये हैं. भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) संघ ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन पी सी मोदी को सौंपे गये ‘कोविड-19 महामारी के वित्तीय विकल्प एवं प्रतिक्रिया (फोर्स)’ शीर्षक से तैयार दस्तावेज में ये सुझाव दिये हैं. इस परिपत्र पर 23 अप्रैल की तारीख है. इसमें कहा गया कि कर राहत सिर्फ ईमानदार और अनुपालन करने वाले करदाताओं को ही दी जानी चाहिए. विशेष रूप से ऐसे करदाताओं को जो समय पर रिटर्न दाखिल करते हैं. दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि रिटर्न दाखिल नहीं करने, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं करने अथवा उसे रोककर रखने, फर्जी नुकसान के दावों के जरिये कर देनदारी कम करके दिखाने के कई मामले सामने आते रहते हैं.

इसमें कहा गया है कि एक करोड़ रुपये से अधिक की आय वाले लोगों पर 30 से बढ़ाकर 40 फीसदी कर लगाया जाना चाहिये. इसके अलावा पांच करोड़ से अधिक की सालाना आय वाले लोगों पर संपदा कर या वेल्थ टैक्स लगाया जाए.

लघु अवधि के लिये दिये गये इन सुझावों से तात्पर्य तीन से छह माह की अवधि है. परिपत्र में कहा गया है कि बजट में सुपर-रिच पर जो कर-अधिभार यानी सरचार्ज लगाया गया है, उससे सरकार को सिर्फ 2,700 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. ऐसे में सुपर-रिच के लिए कर स्लैब बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. एक करोड़ रुपये से अधिक की करयोग्य आय वाले करदाता अति- धनाढ्यों की श्रेणी में आते हैं.

यह परिपत्र 50 आईआरएस अधिकारियों के समूह ने तैयार किया है. इसमें मध्यम अवधि यानी 9 से 12 माह के दौरान अतिरिक्त राजस्व जुटाने को देश में परिचालन कर रही विदेशी कंपनियों पर अधिभार बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया है. इन कंपनियों की एक से दस करोड़ रुपये की आय पर अभी दो फीसदी और 10 करोड़ रुपये से अधिक की आय पर पांच फीसदी अधिभार लगता है. अधिकारियों ने अतिरिक्त राजस्व जुटाने को कोविड-19 उपकर लगाने का भी सुझाव दिया है. इसमें कहा गया है कि एकबारगी चार फीसदी के कोविड राहत उपकर से जरूरी पूंजी निवेश वित्तपोषण में मदद मिलेगी. शुरुआती अनुमान के अनुसार इस तरह के उपकर से 15,000 से 18,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं.

इस सुझाव के विपक्ष का तर्क

हमें किसी भी सुझाव के दोनों पहलुओं का अवलोकन करना चाहिए

इस सुझाव के विपक्ष में निम्नलिखित बातें बोली जा रही हैं!

पहली अगर ये tax लगा तो investers निवेश करने से हिचकिचायेगें परन्तु मेरे विचार में अगर भारत में वस्तुओं और सेवाओं की मांग ही नहीं होगी तो निवेशक वैसे ही निवेश नहीं करेंगे!

दूसरा ये की कुछ सुपर rich देश छोड़ कर ज सकतें हैं,मेरे विचार में जो इस समय भी देश के लिये थोड़ा कष्ट नहीं सह सकता वो देश छोड़ के बेशक चला जाये!

About DARSHIL KASHYAP

Read All Posts By DARSHIL KASHYAP