- News

BOYCOTT CHINA

Boycott chinese product

चीन और चीनी सामान का बहिष्कार करने को आजकल हर कोई बोलता दिख रहा है और मेरे अनुसार सही भी है।

परन्तु क्या सिर्फ बोलने भर से ये सम्भव है?? चलो शुरु से शुरु करते हैं

1991 में जब हमने LPG ( liberalisation privatisation globalisation)

को अपनाया तथा अपने देश के दरवाजे पुरे विश्व के लिये खोल दिये तथा विदेशी निवेश, विदेशी तकनीकी,विदेशी सभ्यता आदी को सहर्ष ही स्वीकार करते गये इससे हमें भी फायदा हुआ,हम सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गये परंतु 1991 से लेकर लम्बे समय तक हमारे और चीन के बीच एक अलिखित समझौता चलता रहा जिसके कारण जब भी कोई चीनी कंपनी भारत में निवेश की योजना लेकर आती थी उसे बड़े शक की निगाह से देखा जाता रहा और सदैव ये प्रयास रहा की चीनी कम्पनियाँ भारत में प्रत्यक्ष निवेश न करें,हाँ चीनी सामान आता जरुर था पर प्रत्यक्ष निवेश नाममात्र का ही था।

परंतु धीरे-धीरे हमने चीनी कम्पनियों को भी आने और प्रत्यक्ष निवेश भी करने दिया और आज हमारी चीनी सामानों पर निर्भरता बहुत बढ़ गयी है। आईये विस्तार में समझते हैं

भारत में इलेक्ट्रानिक उत्पादों के कुल आयत में 45 फीसिदी की हिस्सेदारी है,और मोबाइल फोन आयात का 90 प्रतिशत तक चीन से होता है,फ़ार्मा कम्पनियाँ अपना 65 से 70 प्रतिशत तक आयात चीन से करती हैं,खेल उत्पादों में भी उनपर निर्भर हैं कुस्ती जिसमें हमारे पहलवान बहुत से मैडल लाकर देश का नाम रोशन करते हैं उसका मैट तक चीन से आ रहा है,बैडमिंटन की रॉकेट शटल आदि।

यही नहीं बीते साल के 11 महिनों में भारत के मुकाबले करोबार में चीन 47 अरब डॉलर के सरप्लस पर था।

चीनी कम्पनियों ने भारत के नये स्टार्टप में बहुत पैसा लगाया है

List of Chinese Funded Companies in India

  • Paytm
  • Hike Messenger
  • Snapdeal
  • OLA
  • IBIBO and Make My Trip
  • Flipkart
  • MyDermacy
  • Zomato

इन सबके अलवा पोर्टफोलियो निवेश यानी किसी भारतीय कंपनी में शेयर आदी खरीदने में भी चीनी कम्पनियाँ लगातार अपनी भागीदारी बढाती जा रही हैं,ताजा उदाहरण HDFC बैंक के शेयर खरीदना है।

अब तो चीन और चीन का सामान हम सब के घरों तक पहुँच चुका है अब इस समस्या का समाधान कैसे हो सकता शायद सोशल मीडिया पर #boycott china करके तो नहीं और न ही चीन की लाईट आदि ना खरीद कर चीन कोई रातों रात भारत में इतना नहीं फैल गया।

इसी तरह इसका समाधान भी रातोंरात सम्भव नहीं है।

मेरे अनुसार निम्नलिखित उपाय अपनाये जा सकते हैं।

Solutions

1. मानव संसाधनों के formation में निवेश बढ़ाना अर्थात education,training,research आदी में भारत को अपने खर्च को बढ़ाना ताकी भारतीयों की स्किल बढ़ सेक।

2. दुनिया भर के सारे बाजार cost sensetive होते हैं मतलब अगर समान quality का product कम दाम में मिलेगा तो वो product अधिक बिकेगा इसी को आधर मानकर चीनी कम्पनियाँ देशी कम्पनियों को पछाड़ देती हैं। भारत को इसको काउंटर करना होगा और मेरे अनुसार ये इतना मुश्क़िल भी नहीं है क्योंकि सस्ती लेबर भारत में भी मौजूद है जो चीन के पास है भारत duel price policy अपना सकता है अर्थात भारत में अगर सामान अन्तिम उपभोग के लिये इस्तेमाल होगा तो उसकी किमत अधिक हो और अगर वही सामान मध्यवर्ती वस्तु के रुप में हो रहा है तो उत्पादक को कम किमत पर मिले इससे लागत कम होगी,इसके अलवा tax में छुट आदि भी दी जा सकती है।

3. नये स्टार्टअप में चीनी कम्पनियों के निवेश को कम करना इसमें हमारे देश के पूंजीपति और बैंक महत्वपूर्ण भुमिका निभा सकते हैं।नये बिज़नेस आइडिया को उड़ने के लिये पैसों की आवश्यकता तो होती ही है,जरा सोचो paytm,ola,zomato आदी ने हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने में कितना योगदान दिया है,अब ये विचार तो हम भारतियों के अन्दर ही आये थे ना तो पैसा चीन का क्यूँ लगा क्या ये अधिक बेहतर नहीं होता इन नये विचारों को भारतीय पैसों से ही आगे बढ़ाया जाता।

4. इसके अलवा भी कई और उपाय हो सकते हैं जैसे इम्पोर्ट duty बढ़ाना,चीन की कम्पनियों पर अतिरिक्त tax लगाना आदि।

अन्त में बस ये कहना चाहूँगा की विरोध केवल दो चार महिनों का ना हो आज से सबक लेकर कल कैसे बेहतर बनायें ऐसा हो।

About DARSHIL KASHYAP

Read All Posts By DARSHIL KASHYAP

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *