RECORD Rs 2.54 LAKH CRORE BAD LOAN WRITE-OFF  

Record Rs 2.54 lakh crore bad loan write-off 

सरल शब्दों में बोलूं तो वह LOAN जो अब बिलकुल recover नहीं होगा उसको बन्कों ने अपनी balance sheet से हटा दिया है।

आप इसको एक उदहारण से समझे जैसे आप एक साहुकार हैं ब्याज पर पैसे उधार देतें हैं ।

आपसे गरीब किसान,आम जनता भी लोन लेती है और कुछ पहलवान भी।

चूँकि आम आदमी और किसान का पेट छोटा होता है वो थोड़ा थोड़ा लोन लेते हैं ।

और पहलवानों का पेट मोटा होता है,तो वो बहुत अधिक मात्रा में आपसे लोन लेते हैं ।

बाद में पहलवानों ने सोचा हम तो powerful हैं हम क्यूँ खामखां लोन की किस्ते चूका रहें हैं ।

वो आपके पास आते हैं ओर साफ साफ बोल देते हैं अब हम कोई पैसा वैसा नहीं लौटाएंगे जो करना है कर लो ।

कर्ज में क्यों डूबते जा रहें हैं भारतीय जानाना चाहते हैं तो निचे दिये गये लिंक पर click करें ।

https://indianeconomycurrentsituation.com/2019/09/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A1%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9.html

अब आप चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते पर आपको अपना घाटा भी तो पूरा करना है तो आप आम आदमी व किसानों पर उल्टे-सीधे charges लगाने शुरु कर देते हैं अपना घाटा पूरा करने के लिए ।

और बेचारे कमजोर चुपचाप जुर्माना,charges,और loan की पायी पायी चुकाने में ही दिन रात मेहनत करतें रहतें हैं ।

और पहलवान फिर नजर बनाये हुए हैं ।

कब फिर आपका खाजाना भरे और वो आ जाएं ।

अब इसको विस्तार से समझते हैं आंकड़ो के साथ

अब इसको विस्तार से समझते हैं आंकड़ो के साथ

भारतीय बैंकों ने अपनी किताबों में घटे हुए एनपीए को दिखाने के लिए वित्त वर्ष 19 में बुरे ऋणों का रिकॉर्ड 2.54 लाख करोड़ रुपये लिखा,

जो कि वित्त वर्ष 2015 में जारी है, जैसा कि ईटीआईजी द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है। अकेले राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों ने 1.94 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन लिखे।

बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और केनरा बैंक ने मिलकर 30 जून को समाप्त तिमाही में लगभग 15,000 करोड़ रुपये के बैड लोन को खत्म कर दिया।

बैंकों में ताजा कटौती के चलते विश्लेषकों ने बड़े पैमाने पर गिरावट का श्रेय दिया। उच्च एनपीए उच्चतर राइट-ऑफ़ के लिए।

मार्च 2018 में बैंकों का बुरा ऋण 11.5 प्रतिशत से घटकर मार्च 2019 में 9.3 प्रतिशत हो गया, मार्च 2019 में ताजा एनपीए घटकर 3.7 प्रतिशत रहने की दर के साथ पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.4 प्रतिशत, CRISIL डेटा दिखा। ।

दोनों के लिए एसेट गुणवत्ता अनुपात में सुधार हुआ, हालांकि उच्चतर राइट्स भी आंशिक रूप से उसी के लिए जिम्मेदार थे।

“वित्तीय वर्ष 2019 में नए एनपीए को रोकने की दर के बढ़ने की दर के साथ पिछले वित्त वर्ष से फिसलन जारी है;

वित्तीय वर्ष 2020 में यह उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में यह और गिरकर 3.2 प्रतिशत पर आ जाएगा।

हालांकि, बैंकिंग प्रणाली के लिए चिंता दिवालियापन प्रक्रिया में फंसे खातों से वसूली में धीरे-धीरे गिरावट है।

बैंकों ने वित्त वर्ष 2016 से एनपीए के रूप में लगभग 17 लाख करोड़ रुपये के स्ट्रेस्ड ऋण को मान्यता दी है, लेकिन इन खातों से वसूली बहुत धीमी रही है।

किसानों के loan माफ़ी का विरोध करने वाले आज कहाँ हैं ।

बैंकों को उन सभी लोगों के नाम उजागर करने चाहिए जिनके लोन को एक तरह से माफ कर दिया गया है ।

किसान loan माफ़ी पर जो economist रोते हुए दिखते हैं आज वो कहाँ हैं ।