X

कर्ज में क्यों डूबते जा रहें हैं भारतीय?

कर्ज में डूबे भारतीय

पिछले पांच वर्षों में भारतीयों पर कर्ज लगातार बढता जा रहा है ।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के लोग कर्ज़ में डूबते जा रहे हैं और पिछले पांच साल में घरेलू बचत बहुत तेज़ी से गिर गई है.

पिछले पांच साल में लोगों की देनदारी 58 प्रतिशत बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

ऐसा में नहीं बोल रहा ये विश्व के सबसे बड़े commercial bank SBI की ताजा REPORT में ये दावा किया गया है ।

खपत, का एकमात्र विकल्प उधार लेना है।

कम ब्याज दरों ने बूम और उपभोक्ता मांग को खरीदने की सुविधा प्रदान की, लेकिन अर्थव्यवस्था अब सस्ते पैसे की कीमत का भुगतान कर रही है

क्योंकि पिछले पांच वर्षों में घरेलू बचत छह प्रतिशत तक घट गई है और 58 प्रतिशत तक वित्तीय देयता भी, भारत का सबसे बड़े अनुसंधान बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, ने खुलासा किया।

भारतीय घरेलू बचत, जो अर्थव्यवस्था की धुरी है , वित्त वर्ष 2018 के अंत में एक रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि उपभोक्ता को ऋण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है

क्योंकि पिछले पांच वर्षों में उनकी वित्तीय देयता 58 प्रतिशत बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

कम ब्याज दर इसके लिये उत्तरदायी है , एसबीआई अनुसंधान ने आगे कहा।

संगणना, एकमात्र विकल्प उधार लेना है। अर्थात जब households को पैसों की कमी होती है,तो वह उधार लेते हैं ।

अर्थवयवस्था पर असर ?

घरेलु बचत में आई इस बड़ी गिरावट की वजह घरेलू स्तर पर बचत की दर में आई कमी को माना जा रहा है।

पिछले पांच साल में देश के परिवारों की बचत तकरीबन छह फीसदी (जीडीपी) गिरी है।

आंकड़ों को देखें तो वित्त वर्ष 2012 में जो घरेलू बचत दर 23.6 फीसदी पर थी वो 2018 में घटकर 17.2 फीसदी पर सिमट गई।

घरेलु बचत में आई इस भारी गिरावट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है।

दूसरी ओर इस दौरान देश में निजी निवेश में भी भारी कमी आई है। साल 2007 से 2014 के दौरान जहां निजी निवेश 50 फीसदी था वह 2014 से 2019 के दौरान महज 30 फीसदी रहा।

चारों ओर से आ रहे संकेत और अब ये ताजा आंकड़े साफ बताते हैं कि यह महज एक वित्तीय संकट नहीं है।

इस हालात की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं और पिछले पांच साल में ये काफी गहराई तक पहुचं गई हैं।

Click this link

https://indianeconomycurrentsituation.com/2019/08/current-situation-of-indian-economy.html

अब हालात बेहद चिंताजनक स्थिति पर पहुंच गए हैं। ऐसे में सरकार से कुछ सबको गंभीर राहत के कदम उठाने की उम्मीद है।

सरकार ने कुछ सक्रात्मक कदम उठाये भी हैं। पर उन सब का कितना असर पड़ेगा ये तो कुछ समय बाद ही पता चलेगा ।

DARSHIL KASHYAP:

Comments are closed.