CURRENT SITUATION OF RESERVATION IN INDIA

Reservation in India हमेशा से विवादित topic रहा है, कुछ इसके समर्थक हैं और कुछ विरोध में।

विरोधी तर्क देतें हैं, आरक्षण प्रतिभा को मारता है।पर क्या वास्तव में ऐसा है?

कुछ अंक अधिक लाना क्या प्रतिभा का घोतक होता है?

क्या सबकी परिस्थितियाँ समान थी??

क्या सबको एक जैसी शिक्षा मिलीं हैं?

क्या सबको एक जैसे साधन मिलें हैं?

हम क्यों ये सब सवाल उस सवाल के साथ नहीं जोडते जिसमें merit को सीधा प्रतिभा मापने का एकमात्र साधन मान लिया जाता है।

जातीगत ताना बाना इस समाज में इस तरह समा गया है कि इससे आप चाह कर भी बच नहीं सकते।

लोग अक्सर ये कहते हुए दिखते हैं की आरक्षण तो आर्थिक आधार पर होना चाहिए न की जाती आधारित परन्तु यहाँ ये बात क्यों नहीं बताई जाती कि आर्थिक स्थिति तो उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों पर ही निर्भर करती है न।सदियों से कुछ विशेष जातियां ही वे कार्य करती नजर आती है जिनमें परिश्रम अधिक व कमाई कम से कम होती है ।

और इस बात को हर कोई जानता है कि इन विशेष जातियों कि आर्थिक स्थिति क्या है ।कुछ अपवादों को छोड़कर इनकी स्थिति जस की तस ही बनी हुई है ।वैसे अब आर्थिक अधार पर भी आरक्षण दिया जा रहा है।

इसके पक्षधर कहते आरक्षण से सबको भागीदारी का अवसर मिलता है ।

परन्तु यहाँ ये भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरक्षण का लाभ अधिकतर पिढी दर पिढी कुछ लोग ही ले पा रहे हैं

अमीरों का आरक्षण

जब पैसों के दम पर उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला पाया जाता है तो,

इसको हम मैनेजमेंट कोटा के नाम से पुकारा जाता है ।परन्तु लोग इस पर कटाक्ष करने से बचते हैं ।

शायद इसके पीछे हमारी वो मानसिकता है, जो किसी साधन सम्पन्न व्यक्ति से सवाल पूछना उचित नहीं समझती इसके विपरीत गरीब व्यक्ति से सवाल जवाब करना अपना हक समझती है ।

यंहा समझने वाली बात यह है कि जहाँ जातिगत आरक्षण व आर्थिक आरक्षण का लाभ उठाकर अधिकतर लोग प सी व ग्रुप डी की ही नौकरियां पा पाते हैं ।

पेड सीट वाले सीधा डाक्टर इंजीनियर या मैनेजर आदि बनते हैं ।अब आप खुद अन्दाजा लगाईये काबिलियत कि अधिक आवश्यकता किस पद पर है ।

परन्तु फिर भी हम ये शब्द अधिक सुनते हैं कि फंला जाती का व्यक्ति हमारे बराबर आ गया न कि ये कि आर्थिक स्थिति के कारण फंला व्यक्ति हमारा साहब बन गया ।

आरक्षण वैसे मुख्यतः सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में ही है ।

आरक्षण कोटा भारत में इस प्रकार है ।

Reservation quota in India for Government Jobs

आरक्षण की स्थिति

एससी / एसटी आरक्षण

अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को सेवाओं में आरक्षण प्रदान करने का उद्देश्य केवल इन समुदायों से संबंधित कुछ व्यक्तियों को नौकरी देना नहीं है।यह मूल रूप से उन्हें सशक्त बनाने और राज्य की निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।इसके अलावा, राज्य भी अस्पृश्यता जैसी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए उत्सुक है।

परन्तु आरक्षण केवल आर्थिक विकास तक ही सीमित हो चुका है, जबकि इसको प्रतिनिधित्व की दृष्टि से देखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है ।

पर लोगों ने अपनी सुविधानुसार इसको केवल आर्थिक स्थिति व योग्यता तक ही सीमित रखा हुआ है ।अनुसूचित जाति (SC) को नौकरियों / उच्च शिक्षण संस्थानों में 15% कोटा दिया जाता है जबकि अनुसूचित जनजाति (ST) को नौकरियों / उच्च शिक्षण संस्थानों में 7.5% कोटा दिया जाता है।आरक्षण न केवल सीधी भर्ती के लिए बल्कि एससी / एसटी वर्ग के लिए पदोन्नति के संबंध में भी दिया जाता है।SC / ST आरक्षण के संबंध में ‘क्रीमी लेयर’ की कोई अवधारणा नहीं है। इसका मतलब यह है कि आय की स्थिति या माता-पिता द्वारा आयोजित सरकारी पदों के बावजूद, SC / ST माता-पिता के बच्चों को SC / ST आरक्षण मिलेगा।

ओबीसी आरक्षण

मंडल कमीशन रिपोर्ट (1991) के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण शुरू किया गया था। सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में OBC का कोटा 27% है।हालाँकि, ओबीसी आरक्षण के संबंध में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा है। केवल ओबीसी के जो गैर-क्रीमी लेयर के तहत आते हैं, उन्हें ओबीसी आरक्षण मिलेगा।क्रीमी लेयर की अवधारणा आय और सामाजिक स्थिति को ओबीसी के कुछ विशेषाधिकार प्राप्त सदस्यों को आरक्षण की सीमा से बाहर करने के लिए मापदंडों के रूप में लाती है।

यह अवधारणा यह सुनिश्चित करने के लिए एक जांच भी रखती है कि आरक्षण का लाभ बाद की पीढ़ियों को नहीं मिले।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण

भारत की केंद्र सरकार ने हाल ही में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की शुरुआत की। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में जनरल श्रेणी के उम्मीदवारों के बीच आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% कोटा प्रदान किया जाता है। यह भारतीय संविधान (103 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019) में उसी के लिए खंड जोड़कर किया गया है।

आरक्षण आखिर कब तक

आरक्षण को चाहे जितना मर्ज़ी गलत ठहराया जाये, परन्तु इसके कारण ही भारत की एक कुरीति जिसे जातिवाद कहा जाता है से कुछ छुटकारा पाया गया है ।परन्तु अब भी ये कुरीति भारत में विद्यमान है और जब तक ये रहेगी शायद आरक्षण की जरूरत भी रहेगी ।