INDIA IS NO MORE DEVELOPING COUNTRY

INDIA IS NO MORE DEVELOPING COUNTRY

हम शुरू से पढ़ते आयें हैं भारत एक विकासशील देश है अर्थात ऐसा देश जो developing stage में है,उसका डेवलपमेंट हो रहा है और विकसित होने के और अग्रसर है।
परन्तु वर्ल्ड बैंक के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत को विकासशील देशों की श्रेणी से हटा कर निम्न मध्य आय वाले देशों की श्रेणी में डाल दिया है। अब भारत पाकिस्तान ,घाना ,श्रीलंका,जाम्बिआ , आदि  देशो के साथ  खड़ा है।
वर्ल्ड बैंक ने सभी देशो को चार  श्रेणियों में बाँट दिया है पहली उच्च आय अर्थव्यवस्थाएं:इसमें वो सभी देश हैं जिसे पहले विकसित देश कहा जाता था इसमें usa ,ब्रिटेन ,फ्रांस आदि देश है
दूसरी ऊपरी  मध्यम आय अर्थव्यवस्थाएं इसमें वो देश हैं जो पहले विकासशील देश थे जैसे चीन ,साउथ अफ्रीका ,ब्राज़ील
तीसरी निम्न मध्यम आय अर्थव्यवस्थाएं इसमें उन देशों को रखा गया है जिन्हे प्राय गरीब देश कहा जाता है।
चौथी निम्न आय वाली अर्थव्यवस्थाएँ इस श्रेणी में अत्यंत गरीब देशों को रखा गया है।

विश्व बैंक ने अपनी आय के आधार पर देशों के वर्गीकरण को निम्न प्रकार किया है :

निम्न आय वाली अर्थव्यवस्थाएँ: प्रति व्यक्ति आय वाली अर्थव्यवस्थाएँ $ 1005 से कम। इनमे ये देश हैं अफगानिस्तानबांग्लादेश और नेपाल आदि। 
निम्न मध्यम आय अर्थव्यवस्थाएं: $ 1006 – $ 3995 के बीच प्रति व्यक्ति आय वाली अर्थव्यवस्थाएं। अब भारत को निम्न मध्यम आय‘ वाले देशों में शामिल किया गया है। भारत के साथ ही पाकिस्तान व श्रीलंका भी इसी श्रेणी में शामिल हैं। 
ऊपरी मध्य आय अर्थव्यवस्थाएं: $ 3956 – $ 12235 के बीच प्रति व्यक्ति आय के साथ अर्थव्यवस्थाएं। इनमें  चीनब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ,मेक्सिकोआदि देश हैं। 
उच्च आय अर्थव्यवस्थाएं: प्रति व्यक्ति आय वाली अर्थव्यवस्थाएं $ 12235 से अधिक हैं। इनमें अमेरिका, रूस और सिंगापुर आदि देश हैं। 
विश्व बैंक ने दो देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करते हुए विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की अवधारणा को हटा दिया, है।
भारत दक्षिण एशिया में अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहता है ,पर उसको इस ताज़ा रिपोर्ट से झटका लगा है। ब्रिक्स देशों में से केवल भारत ही निम्न मध्यम आय श्रेणी में है नहीं तो बाकि सभी सदस्य देश चीन साउथ अफ्रीका ब्राज़ील आदि अगली ऊपरी मध्य आय  श्रेणी यानि विकासशील देशों में ही शामिल है।

भारत को ऊपरी मध्य आय श्रेणी में शामिल न करने के कारण

World Bank to change classification of countries; India will now be called ‘lower-middle income’
आप उपरोक्त मापदंडो को देखें आपको  पता चल जायेगा आखिर क्यों अब भारत विकासशील देश नहीं रहा सिर्फ एक मापदंड को छोड़कर सबमे भारत का प्रदर्शन निराशाजनक है।

भारत की प्रति व्यक्ति आय $1006 -$3995 के बिच में है अतः इसलिए भारत को इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

वर्ल्ड बैंक से लोन बढ़ना भी एक कारण रहा है। भारत का इस समय वर्ल्ड बैंक से कुल 676 अरब रूपये से ज्यादा का कर्ज अभी तक चढ़ चूका है। जो देश अधिक कर्ज में दुबे है तथा चुकाने की स्थिति में उतने सदृढ़ नहीं नजर आ रहे उसको भी वर्ल्ड बैंक ने कंसीडर किया है।

मातृत्व मृत्यु दर व् शिशु मृत्यु दर को भी वर्ल्ड बैंक ने पैमाना रखा जिसमे भारत पिछड़ता नजर आया।

व्यपार शुरू करने में लगा समय भी एक पैमाना था वैसे इसमें सुधार हुआ है यही एक इंडिकेटर है जिसमे भारत एवरेज से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

सरकार ने कितना पैसा टैक्स कलेक्शन से प्राप्त किया ,स्टॉक एक्सचेंज की स्थिति ,बिजली उत्पादन ,साफ सफाई आदि मुद्दों की  कसौटी पर भारत को परखा गया तथा सबमे भारत का प्रदर्शन औसत से कम पाया गया इसीलिए भारत को विकासशील देशों की श्रेणी से निकालकर एक श्रेणी कम कर दिया गया अब भारत निम्न मध्यम आय वर्ग की श्रेणी में है।

ये भारत की शाख को एक झटका है।

इससे कैसे उबरा जाये

मेरे कुछ सुझाव निम्नलिखित है।
सामजिक सुरक्षा व हॉस्पिटल आदि की सुविधाओं को दुरुस्त करने और कुपोषण की समस्या से निपटने की आवश्यकता है ताकि मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में कमी आये।
देश की GDP को बढ़ाने तथा जनसंख्या को कम करने की आवश्यकता है। जिससे प्रति व्यक्ति आय बढ़ सके।
भारत की करंट इकनोमिक कंडीशन जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

वर्ल्ड बैंक के लोन को चुकाने का प्रयास करना इसके लिए विदेशी मुद्रा के भंडार को बढ़ाने की आवश्यकता है अतः  निर्यात को बढ़ाने व आयात को कम करना चाहिए।
सरकार को अपना टैक्स कलेक्शन बढ़ाना चाहिए।
नोट बंदी और जल्दबाजी में लागु की गयी GST के कारण छोटे व मझले उधोग धंधो को काफी नुकसान  पहुंचा है लोगों की वस्तु खरीदने की क्षमता भी काफी कम हो गयी है। इस समय जरुरत है भारतीय अर्थव्यस्था में कुछ धन इंजेक्ट किया जाये जिससे वो पटरी पर पुनः आ सकती है। इसके लिए UBI SCHEME एक अच्छा हतियार हो सकती अधिक जानकारी के लिए ये पढ़ें