GIVING BACK TO SOCIETY

GIVING BACK TO SOCIETY

अपने समाज के लिए जब हम कुछ करते हैं चाहे वो आर्थिक मदद हो या अपना समय देना तो उसे Return back to society बोलते हैं।

हर व्यक्ति को उसका समाज, उसका देश और प्रकृति बहुत कुछ देती है।बदले मेंं हम क्या उनको वापिस दे पा रहे हैं??

ये giving back to society यानी समाज व मानवता के लिए कुछ कर गुजर देने का जज्बा ही किसी को भीम राव अम्बेडकर, किसी को ज्योतिबाफुले,और किसी को विवेकानंद बना देता है।

आज के परिपेक्ष्य मेंं देखें तो सुपर 30 जैसे संस्थान giving back to society के सिद्धांत पर ही चल रहे हैं।जिसमें एक शिक्षक प्रतिभाशाली मगर साधनहीन छात्रों को एक राह दिखाने का कार्य कर रहा है।

आइए कुछ अधिक जानते हैं सुपर 30 के बारे मेंं

सुपर 30 एक भारतीय शैक्षिक कार्यक्रम है जो पटना, भारत में रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स के बैनर तले शुरू किया गया है। यह सह-संस्थापक 2002 में अभयानंद, एक आईपीएस अधिकारी, और आनंद कुमार गणित शिक्षक थे।

यह कार्यक्रम भारतीय समाज के आर्थिक रूप से वंचित वर्गों से प्रत्येक वर्ष 30 प्रतिभाशाली मगर आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों का चयन करता है और उन्हें जेईई के लिए प्रशिक्षित करता है।

पिछले कई वर्षों से सुपर ३० उन आँखों को सपने दिखा भी रहा है और पुरे भी कर रहा है जिनको सपने देखने का हक़ भी नहीं था।

SUPER 30 HISTORY AND ACHIEVEMENT

2002 में, अभयानंद और आनंद कुमार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के 30 प्रतिभाशाली छात्रों को चुनने की योजना के साथ सुपर 30 की शुरुआत की, जो आईआईटी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे।

इन 30 छात्रों को तब IIT-JEE परीक्षा पास करने के लिए तैयार किया गया था। आनंद कुमार की मां जयंती देवी ने छात्रों के लिए खाना बनाने के लिए स्वेच्छा से भोजन किया, जबकि आनंद, अभयानंद और अन्य शिक्षकों ने उन्हें पढ़ाया। छात्रों को एक वर्ष के लिए मुफ्त में अध्ययन सामग्री और आवास भी प्रदान किए गए।

कोचिंग के पहले वर्ष में, 30 में से 18 छात्रों ने IIT में प्रवेश किया। अगले वर्ष, कार्यक्रम की लोकप्रियता के कारण आवेदन संख्या बढ़ गई और 30 छात्रों का चयन करने के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई। 2004 में, 30 में से 22 छात्रों ने IIT-JEE के लिए अर्हता प्राप्त की, जिससे कार्यक्रम की लोकप्रियता बढ़ गई जिसने और भी अधिक अनुप्रयोगों को आकर्षित किया।

2005 में, 30 में से 26 छात्रों ने IIT-JEE की परीक्षा पास की, जबकि 2006 में 28 – इस तथ्य के बावजूद कि IIT ने परीक्षा संरचना को बदल दिया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए, बिहार के मुख्यमंत्री ने उस समय नीतीश कुमार को 50,000 रुपये के नकद पुरस्कार के साथ बधाई दी।

अगले वर्ष 28 और छात्रों ने IIT-JEE को मंजूरी दे दी, और 2008 में, Super 30 के सभी छात्रों ने IIT-JEE को मंजूरी दे दी, जिसके बाद अभयानंद ने Super 30 को छोड़ते हुए कहा “प्रयोग समाप्त हो गया है।

NEW SUPER 30 FORMED

कुमार के कुछ पूर्व छात्रों ने Super 30 शिक्षकों के रूप में कार्य किया और एक तरह से कुछ लोटाया समाज को परिणाम भी अच्छे रहे।

2009 और 2010 में सभी 30 छात्रों ने फिर से IIT JEE परीक्षा उत्तीर्ण की।

बाद के वर्षों में 30 छात्रों की सफलता की दर थी: 2011 (24 उत्तीर्ण), 2012 (27 उत्तीर्ण), 2013 (28 उत्तीर्ण), 2014 (27 उत्तीर्ण) ), 2015(25 उत्तीर्ण), और 2016 में (21 उत्तीर्ण)। 2017 में, सभी सुपर 30 उम्मीदवारों ने IIT-JEE.In 2018 में, 30 में से 26 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की।

अब तो इसी सुपर 30 की तर्ज पर बहुत से सुपर 30 खुल गयें हैं। अब वो कितने कामयाब हैंं। इसका डाटा तो फिलहाल मेरे पास नहीं है, परन्तु ये एक विचार है जो हम सब मेंं विधमान है।

केवल शिक्षा के क्षेत्र मे ही नहीं अन्य क्षेत्रों मेंं भी सुपर 30 की दरकार है। क्योंकि प्रतिभा केवल जाती या साधन की मोहताज नहीं होती ।और प्रतिभा को निखरने के अवसर सबको समान रुप से मिलने चाहिए।

Corporate businesses हमेशा से बुद्धिजीवियों के निशाने पर रहेंं हैं। परंतु ये corporates भी अपनी कमाई का 2% corporate social responsibility (CSR)

के रूप मे खर्च करते हैं।

Corporate social responsibilty(CSR)

CSR एक उभरती हुई व्यावसायिक प्रथा है जो कंपनी के व्यवसाय मॉडल में सतत विकास को शामिल करती है। इसका सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) यह है कि कंपनियां समाज पर समग्र सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का प्रबंधन कैसे करती हैं। यह स्थिरता, सामाजिक प्रभाव और नैतिकता को शामिल करता है.

सामाजिक सरोकार

मानवता के लिए दान करने का कारण है कि लगातार गरीबी से लड़ना, एड्स या इबोला जैसी महामारी के शिकार लोगों की मदद करना, या तूफान या भूकंप से विस्थापित लोगों की सहायता करना उन मुद्दों के लिए चिंता दिखाता है जो उपभोक्ता हमारी आधुनिक, परस्पर दुनिया में अधिक से अधिक जागरूक हैं।
स्थानीय समुदाय: स्थानीय सामुदायिक परियोजनाओं में भागीदारी, या तो वित्तीय दान, कर्मचारी भागीदारी, परियोजना के नेताओं के साथ अपने ग्राहकों को जोड़ना, या विज्ञापन और धन उगाहने के माध्यम से परियोजना को बढ़ावा देना आदि।

समाज हम सब से ही बनता है और हम सबको कुछ न कुछ return back अवश्य करना चाहिए।

Individual level पर हम ये निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं।

Volunteer

आप एक volunteer के तोर पर अपना योगदान दे सकते हैं। फिर चाहे वो खेल के मैदान मेंं हो,रक्त दान शिविर मेंं योगदान हो या कोई प्राकृतिक आपदा आने पर हो।

स्वेच्छा से किसी के लिए कुछ करना अत्यंत सुखद अनुभव देता है।

प्रतिभा के अनुसार योगदान

आप अपनी प्रतिभा से भी समाज को कुछ वापिस कर सकते हैं।

सभी के पास कुछ न कुछ अच्छा है। आपका कौशल क्या है? शायद आप ग्राफिक डिजाइन के साथ अच्छे हैं? शायद आप गरीब बच्चों को अंग्रेजी सिखा सकते हैं? शायद आपको बुनाई का शौक है?

आप छोटे तरीके से भी मदद कर सकते हैं। पता लगाएँ कि आपकी प्रतिभा क्या है और इसे वापस देने के लिए उपयोग करना शुरू करें!

जैसे कुछ डॉक्टर गरीब मरीजों का मुफ्त ईलाज करते हैं, शिक्षक मुफ्त मेंं पढाते हैं, आदि।

DONATION

अपने पसंदीदा चैरिटी को कुछ RUPEES देकर उन लोगों की मदद करें। कुछ लोग हर तनख्वाह का कुछ प्रतिशत दान करते हैं, लेकिन अगर आपके पास देने के लिए पैसा नहीं है तब भी आप मदद कर सकते हैं। आर्थिक रूप से देने के बजाय, आपके पास क्या है, जैसे कि अपने पुराने परन्तु अच्छी हालत वाले कपड़े दान करना या पुस्तकालयों, स्कूलों या आश्रयों को किताबें देना।

या स्थानीय खाद्य बैंक को भोजन दान करें। बच्चों के लिए खिलौने के लिए NGO वाले हमेशा तलाश में रहते हैं ताकि गरीब बच्चों को जरूरत के हिसाब से नए खिलौने दिए जा सकें।

अफवाहों को रोकें।

भारत इस समय fake news के दोर से गुजर रहा हैं।

अतः अब हर भारतीय का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वे न केवल fake news को बढाने से रोके,बल्कि साथ ही जो एसा करते हैं उनको समझायेंं भी की वे एसा न करें।

साथ ही इसके दुःपरिणामों से भी लोगों को अवगत करायें।