CHAMKI FEVER KARAN, LAKSHAN,UPCHAR OR JIMMEDAR KAUN??

BIHAR CHAMKI BUKHAR SE MAUTON KA JIMMEDAR KAUN?

उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर और बस्‍ती मंडल में कई दशकों से कहर बरपाने के बाद अब मासूमों का कातिल चमकी बुखार यानी इंसेफ्लाइटिस बिहार में कहर बरपा रहा है. बिहार के मुजफ्फर नगर में यही इंसेफ्लाइटिस ‘चमकी’ बुखार नामसे मासूम बच्चों की जिंदगी छीन रहा है. अब इस बुखार ने करीब 103 बच्चों की जान ले ली है. पूर्वांचल में जहां इस बुखार के पीछे मच्‍छरों को जिम्‍मेदार माना जाता है वहीं बिहार में कहा जा रहा है कि लीची खाने की वजह से बच्चे इस बुखार का शिकार हो रहे हैं.

कोई बोल रहा है की गर्मी अधिक पड़ रही है ,कोई बोलता है गन्दगी और गरीबी के कारण,…. किसी को इलाज की कमी 100 से अधिक बच्चों के मौत की वजहें नजर आ रही है।

पर क्या असली वजह इनके माता पिता नहीं हैं जो लगभग पिछले 10 वर्षों से ऐसे ही मौतें देखते आ रहें हैं परन्तु वो इसे चुनावी मुद्दा बनाने में असफल रहे।

संभव है,इस चमकी बुखार अर्थात acute encephalitis syndrome (AES) से निपटारे को सरकार अपनी प्राथमिकता में रखती अगर इन मासूमों के माता पिता ने अपने जन प्रतिनिधियों से पूछा होता वो क्या करेंगे चुनाव जितने के बाद इस समस्या के हल के लिए ?

परन्तु न उनके लिए न उन नेताओं के लिए ये प्राथमिकता है सबके लिए अब प्राथमिकताएं हिन्दू मुस्लिम जात -पात आदि ही है।

इसीलिए न सरकारें गंभीर होती हैं न हम लोग इन हादसों पर कुछ दिन बात होगी फिर सब भूल जायेंगे। पर सोचने की बात है जब बिहार सरकार इन मौतों के बाद 4 लाख रूपये प्रत्येक परिवार को दे सकती है तो यही पैसा पहले खर्च करके इन हादसों को रोका भी तो जा सकता है।

पिछले 10 सालों से यही हाल

पिछले 10 सालों से कमोबेश यही हाल है कभी मोतें 100 का आकडा पार कर जाती है कभी नहीं पर समस्या जस की तस बनी हुई है।

सन् 2014 मेंं जब 300 से ज्यादा बच्चे इसी बिमारी के चलते काल की ग्रस्त में समा गए थे ।

तब बड़ी बड़ी घोषणाएं हुई थी।जैसे बड़ा अस्पताल बनेगा, हर बच्चे का टीकाकरण किया जाएगा।

पर नतीजा वही ढाक के तीन पात।

इस बार फिर घोषणाएं हो रही है. उम्मीद है अब कुछ सकारात्मक कार्य किया जाएगा तथा बच्चों और उनके अभिभावकों को इस मौत के खेल से छुटकारा मिलेगा।

पिछले 10 सालों का डाटा आपके समक्ष है।

WHAT IS CHAMKI FEVER

एन्सेफलाइटिस (चमकी बुखार): कारण, लक्षण और उपचार


मस्तिष्क में सूजन होने पर एन्सेफलाइटिस होता है। इसे तीव्र वायरल इन्सेफेलाइटिस या असेप्टिक एन्सेफलाइटिस और हिंदी में चमकी बुखार भी कहा जाता है। सूजन मस्तिष्क में सूजन या जलन हो सकती है। यह एक दुर्लभ बीमारी है .

इस बीमारी के अधिकांश हताहतों की आयु 1-10 के बीच होती है

एन्सेफलाइटिस या तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम क्या है?

तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम चिकित्सकीय रूप से समान न्यूरोलॉजिकल अभिव्यक्ति का एक समूह है जिसे बुखार की तीव्र शुरुआत के रूप में जाना जाता है और किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को भटकाव, प्रलाप, मानसिक भ्रम, कोमा, व्यक्तित्व परिवर्तन, कमजोरी, एक व्यक्ति में दौरे की नई शुरुआत की तरह बदल दिया जाता है वर्ष के किसी भी समय किसी भी उम्र और प्रभावित मस्तिष्क के हिस्से के आधार पर अन्य लक्षण। यह देखा गया है कि इस बीमारी के मामले ज्यादातर अप्रैल से जून के दौरान होते हैं जो मुख्य रूप से कम उम्र के बच्चों में होते हैं और वे भी जिन्हें लीची के बाग में जाने का इतिहास है।

एन्सेफलाइटिस या एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम: कारण

  • सूजन या तो मस्तिष्क पर हमला करने वाले संक्रमण के कारण या प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा मस्तिष्क पर हमला करने के कारण होती है।
  • एक्यूट इंसेफेलाइटिस के मुख्य प्रेरक कारक हर्पीज वायरस, एंटरोवायरस, वेस्ट नाइल, जापानी इंसेफेलाइटिस, पूर्वी इक्वीन वायरस, टिक-जनित वायरस आदि हैं।
  • एन्सेफलाइटिस बैक्टीरिया, कवक या परजीवी, रसायन, विषाक्त पदार्थों और गैर-संक्रामक एजेंटों के कारण भी होता है।
  • आपको बता दें कि भारत में Acute Emcephalitis Syndrome का बड़ा कारण जापानी वायरस के कारण दूसरी ओर Nipah वायरस और Zika वायरस भी Acute Encephalitis Syndrome रोग के कारण पाए जाते हैं।

संक्रमण के दौरान या बाद में वायरल इन्सेफेलाइटिस कई वायरल बीमारी जैसे इन्फ्लूएंजा, हर्पीज सिम्प्लेक्स, खसरा, कण्ठमाला, रूबेला, रेबीज, चिकनपॉक्स और अर्बोवायरस संक्रमण के साथ विकसित हो सकता है, जिसमें वेस्ट नील वायरस भी शामिल है।

  • हरपीज सिम्प्लेक्स टाइप 1 वायरस वायरल एन्सेफलाइटिस के अधिक सामान्य और गंभीर कारणों में से एक है।
  • एईएस के अन्य कारणों में चंडीउरा वायरस, कण्ठमाला, खसरा, डेंगू हैं; Parvovirus B4, एपस्टीन-बार वायरस S. निमोनिया आदि भारत से छिटपुट और फैलने में तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम के अन्य कारण हैं।

एन्सेफलाइटिस या एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम: लक्षण

  • उच्च बुखार
  • उल्टी
  • सरदर्द
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
  • उलझन
  • गर्दन और पीठ का अकड़ना
  • जी मिचलाना
  • व्यक्तित्व में बदलाव
  • भाषण या सुनने में समस्या
  • मतिभ्रम
  • स्मृति हानि
  • उनींदापन
  • गंभीर मामलों में दौरे, लकवा और कोमा

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से कौन प्रभावित है?

यह मूल रूप से 15 साल से कम उम्र की आबादी को प्रभावित करता है।

  • करणीय जीव में मौसमी और भौगोलिक भिन्नता होती है।
  • जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस के गंगा के मैदान सहित पूर्वी यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में इसके स्थानिक क्षेत्र हैं।

कुछ अध्ययनों के अनुसार कहा जाता है कि भारत में उत्तर और पूर्वी भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का प्रकोप खाली पेट खाने वाले बच्चों को बिना लीची के फल खाने से जोड़ा गया है। टॉक्सिंस हाइपोग्लाइसीन ए और मेथिलीनसाइक्लोप्रोपाइलग्लिसिन (MCPG) एक अप्रीती फल में मौजूद होते हैं जो बड़ी मात्रा में होने पर उल्टी का कारण बनते हैं। हाइपोग्लाइसीन ए में अमीनो एसिड होता है जो अनरिचर्ड लीची में पाया जाता है और MCPG लीची के बीजों में पाया जाने वाला एक ज़हरीला यौगिक है जो ब्लड शुगर, उल्टी, परिवर्तित मानसिक अवस्था, बेहोशी, कोमा और मृत्यु में अचानक गिरावट का कारण बनता है। ये विषाक्त पदार्थ अचानक उच्च बुखार और दौरे का कारण बनते हैं और विशेष रूप से कुपोषित बच्चों में तत्काल उपचार, अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।

एन्सेफलाइटिस के लिए उपचार

  1. एन्सेफलाइटिस से पीड़ित बच्चों को किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए गहन चिकित्सा इकाई या आईसीयू में रखा जाना चाहिए।
  2. सिर दर्द और तापमान को कम करने के लिए एसिटामिनोफेन, इबुप्रोफेन और नेपरोक्सन सोडियम जैसे विरोधी भड़काऊ दवाओं द्वारा इसका इलाज किया जा सकता है।
  3. इंसेफेलाइटिस के ज्यादातर मामले कुछ ही दिनों में सुलझ जाते हैं। एक गंभीर स्थिति के मामले में, कुछ सप्ताह लग सकते हैं।

कारण चाहे कोई भी हो गरीबी ,कुपोषण, गर्मी, गन्दगी या कुछ और परन्तु वास्तविकता यही है की न तो सरकारे गंभीर है । और न ही हम और आप।