PRATAP CHANDRA SARANGI

PRATAP CHANDRA SARANGI

प्रताप चंद्र सारंगी ये नाम आजकल सबकी जुबान पर है। और सोशल मीडिया में इनके बारे में खूब लिखा जा रहा है।
64 वर्षीय सारंगी ने 30 मई को शपथ ग्रहण के दौरान काफी हलचल मचाई थी, जिसमें उनके बालों के अनचाहे बाल और सफेद कुर्ता था.
आखिर खास बात क्या है इनमें ,ये 542 चुने गए लोकसभा सांसदों में से एक है पर जहाँ एक और उनमे से लगभग 475 सांसद करोड़पति हैं यानि 88 % करोड़पति लोग लोकसभा तक पहुंचे हैं।
वहीं उनमें एक शक्श ऐसा भी जिसके पास खुद का घर भी नहीं है झोपड़े में रहता है पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करता है तथा साइकिल से उसने अपना प्रचार किया था। उनका ही नाम प्रताप चंद्र सांरगी है।
ओडिशा के पहली बार बीजेपी सांसद  प्रताप चंद्र सारंगी, जो नरेंद्र मोदी सरकार  में मंत्री बने हैं, अपनी सरल जीवनशैली और अचूक तरीके से लहरें बना रहे हैं।
 सारंगी ने ओडिशा में सबसे अमीर उम्मीदवारों में से दो जो उनके विपक्ष में थे  को साइकिल पर प्रचार से ही हराया । राज्य कांग्रेस प्रमुख निरंजन पटनायक के पुत्र नवज्योति पटनायक के पास 104 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है, जबकि बीजद के सांसद रवीन्द्र जेना की संपत्ति लगभग 72 करोड़ रुपये थी।
आईये उनके जीवन के बारे में जानते हैं।

जीवन परिचय

प्रताप चंद्र सारंगी 4 जनवरी 1955 को जन्मे, भारत सरकार में राज्य मंत्री और बालासोर, ओडिशा के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य के रूप में कार्य करते हैं। वह दो बार ओडिशा विधान सभा के सदस्य चुने गए थे: 2004 से 2009 तक और 2009 से 2014 तक, दोनों बार नीलागिरी निर्वाचन क्षेत्र से।
उन्होंने 2014 में भारतीय जनता पार्टी के बालासोर से लोकसभा चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें वह हार गए थे।
उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा क्षेत्र बालासोर से 2019 के भारतीय आम चुनाव में फिर से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने बीजू जनता दल के उम्मीदवार और मौजूदा सांसद रवीन्द्र कुमार जेना को 12,956 वोटों के अंतर से हराया।

प्रताप चंद्र सारंगी की शुरुवाती जीवन व शिक्षा

प्रताप सारंगी का जन्म 4 जनवरी 1955 को गोपीनाथपुर, नीलगिर, बालासोर गाँव में हुआ था। उन्होंने 1975 में उत्कल विश्वविद्यालय के तहत बालासोर के फकीर मोहन कॉलेज से अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की।
बचपन से ही श्री प्रताप सारंगी एक आध्यात्मिक साधक थे। वह रामकृष्ण मठ का भिक्षु बनना चाहता था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रामकृष्ण आदेश के मुख्यालय बेलूर मठ में कई दौरे किए। मठ के भिक्षुओं ने उनकी इच्छा के बारे में श्री प्रताप सारंगी से चर्चा की और उनके बायोडाटा की जांच की। उन्हें पता चला कि प्रताप सारंगी की विधवा माँ जीवित थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रताप सारंगी को वापस जाना चाहिए और उसकी सेवा करनी चाहिए। अपने गाँव लौटने के बाद, वह विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में शामिल हो गया।

समाज में उनका योगदान

इन्होने बालासोर और मयूरभंज जिले में आदिवासी गाँवों में बच्चों की शिक्षा के लिए गरीब और असहायों के लिए  गण शिखा मंदिर योजना के तहत प्रताप सारंगी कई स्कूल खोले, उनके क्षेत्र में गरीब बच्चों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए अपनी विधायक पेंशन का बड़ा हिस्सा खर्च कियाहै।

आखिर क्यों हैं खास इनकी जीत और मंत्रिपद ।

उनका सादा जीवन ही उनको विशिष्ट बना रहा है ,जहाँ एक और हर जगह केवल साधन संपन्न लोग ही पहुँच पा रहें हैं ,उनमे प्रताप चंद्र सारंगी जैसे लोग अपवाद बन के उभरना लोगों के मध्य एक सुखद अनिभूति दे रहा है तथा इस उम्मीद को कायम रखने में भी कामयाब हो रहा है की कामायाबी केवल साधन की मोहताज नहीं है।
इन सब के बिच एक सवाल जरूर पूछना चाहिए की क्यों 88 % करोड़पति लोग लोकसभा सांसद बन रहें है ?
क्या चुनाव जितना और धन का आपस में कोई सम्बन्ध हैं ?
अगर आंकड़ों की बात माने तो हाँ लोकसभा जीत और धन में सम्बन्ध साफ़ दिख रहा है। प्रचार मुख्य भूमिका निभाता है ,या शायद ये सोच की ये तो पहले से ही आमिर है इसलिए भ्रष्टाचार नहीं करेगा।
मेरे विचार में आम जनता को सारंगी जैसे लोगों का चयन अधिक करना चाहिए। चाहे वे किसी भी राजनैतिक दल के क्यों न हो क्योंकि ऐसे लोग जो ज़मीन से जुड़े  हुए हैं,जो जनता की समस्याओं को अधिक समझते हैं तथा उनकी बात को संसद तक अच्छे ढंग से पहुंचा सकते हैं।
न की उन चमकते सितारों का जो अपने खुद के दूसरे व्यवसायों में व्यस्त हैं। प्रताप चंद्र जैसे समाज सेवी ही सांसद या पार्षद बनने के अधिक योग्य होतें हैं।

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