HOW TO DEVELOP READING HABITS AMONG KIDS

HOW TO DEVELOP READING HABITS AMONG KIDS?

आज कल बच्चों /छात्रों में रीडिंग हैबिट्स ख़त्म ही होती जा रही है ,इसका प्रमुख कारण मोबाइल और टेलीविज़न का अत्यधिक प्रयोग है। पढ़ने की आदत सुनने की आदत से जुडी हुई है पहले बच्चे मनोरंजन के लिए अपने दादा -दादी ,माता -पिता आदि से रोज़ाना कहानी सुन के ही सोते थे क्यूंकि यही उनका मनोरंजन का साधन होता था रात में  सोने से पहले।

सुनने से कल्पना शीलता का विकास तो होता ही है ,साथ ही साथ स्वयं पढ़ने की इच्छा का भी विकास होता है। परन्तु अब रात्रि में टेलीविज़न या मोबाइल चलाना ही बच्चे अधिक पसंद करते है न की कहानी सुनकर या पढ़कर सोना। 
अच्छे  बाल साहित्य का आभाव भी एक कारण है,छात्रों / बच्चों  में पढ़ने की आदत के ह्रास होने का। 80 या 90 के दशक में फिर भी कुछ मैगज़ीन और कॉमिक्स मौजूद थी जिसे छात्र बड़े चाव से पढ़ते थे खासकर गर्मियों की छुटियों में। 
ये मैगज़ीन और कॉमिक्स पढ़ना उनमे जाने अनजाने पठन कौशल का विकास कर देते थे। अतः तब के शिक्षकों व् अभिभावकों पठन कौशल विकसित करने के लिए बहुत अधिक प्रयास नहीं करने पड़ते थे। परन्तु आज के परिवेश में यह बहुत कठिन कार्य बन गया है। 
फिर भी निम्नलिखित उपायों से छात्रों में रीडिंग हैबिट्स का विकास किया जा सकता है। 

CREATE A READING AREA.

अपने बच्चे को उसकी मदद से पढ़ने के लिए एक क्षेत्र बनाएँ। बीन बैग की कुर्सी, मज़े का सामान, कई तरह की किताबें, और आपके बच्चे के पास अपना पढ़ने का कोना होगा। उस कोने थोड़ा आकर्षक बनाने का प्रयास करे तथा उस कमरे में टीवी रेडियो आदि न रखें। 

BE A ROLL MODEL FOR KIDS/STUDENTS

एक रोल मॉडल के रूप में कार्य करें और अपने बच्चे के सामने पढ़ें। आपको पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और किताबों को पढ़ते हुए देखना आपके बच्चे को दिखाता है कि पढ़ना महत्वपूर्ण है। जब आप पढ़ रहे हों, तो अपने बच्चे को उसकी किताब के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। तथा उस समय मोबाइल या टीवी देखने से बंचे और हो सके तो उनकी उम्र के अनुसार के विषय उनके साथ डिस्कस करें इससे बच्चों को पता चलेगा पढ़ने से बहुत सी नयी बातों का पता चलता है।

MAKE CONNECTION BETWEEN READING AND REAL LIFE 

बच्चे जब जो पढ़ते हैं उसका रियल लाइफ से कोई कनेक्शन मिलता है तो वे अत्यधिक प्रेरित होते हैं। जैसे बच्चों ने उत्तराखंड की पहाड़ियों से संबधित कोई कहानी पढ़ी तथा जब वे  वंहा घूमने  गए और उसे वैसा ही  पाया जैसा पुस्तक में उसका वर्णन था ,तब उन्हें किताब पढ़ना उचित लगता हैऔर वे प्रेरित भी होते हैं.
 पढ़ना उनको बोरिंग न लगकर ज्ञानवर्धक लगने लगता है। 

MAKE READING ENVIRONMENT ENJOYABLE

बाजार में  विभिन्न प्रकार की किताबें हैं जो विभिन्न आयु वर्गों के अनुरूप हैं। चित्रों वाली  किताबें या अन्य रचनात्मक रूप से प्रकाशित ग्रंथों का चयन करें और यदि आप अपने बच्चों को पढ़ा  रहे हैं, तो आप अपनी रुचि बनाए रखने के लिए अपनी आवाज़ को बदल सकते हैं तथा उचित हाव भाव व एक्शन के साथ भी कहानी का वाचन कर सकते हैं । अपने बच्चे के बेडरूम में रीडिंग टेंट या मिनी-लाइब्रेरी स्थापित करना भी उन्हें अधिक बार पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

KEEP READING MATERIAL IN THE REACH OF KIDS 

अपने बच्चों के लिए पठन सामग्री हमेशा अपने घर में रखें तथा सामग्री को बच्चों की रीच में रखें अर्थात पठन सामग्री उन स्थान पर रखीं जाएँ जहाँ से वे आसानी से उनको उठा संके पढ़ सके। 

USE INTERACTIVE OR SOUND BOOK

इंटरएक्टिव पुस्तकों में ध्वनि बटन और पुल-आउट तथ्य हो सकते हैं जो कहानियों को जीवन में लाने के लिए काम करेंगे। बच्चे पढ़ी जा रही कहानी भी सुन सकते हैं क्योंकि वे पृष्ठ पर दिए गए शब्दों का अनुसरण करते हैं।

EXPOSE BOOKS TO THEM OF DIFFERENT GENRES 

पढ़ना पारंपरिक कहानियों तक सीमित नहीं है। बच्चों को गैर-काल्पनिक पुस्तकों को पढ़ने में भी मज़ा आ सकता है, जिसमें विश्वकोश, साथ ही साथ बच्चों पर लक्षित समाचार पत्र भी शामिल हैं। कॉमिक पुस्तकें,बाल साहित्य ,या अन्य रोचक पुस्तकें भी  पढ़ने में उनकी रुचि को भी बढ़ा सकती हैं।

TALK ABOUT WHAT YOUR CHILD IS READING

आपके बच्चे ने एक किताब खत्म करने के बाद, जो हुआ उसके बारे में बात करें और पूछें कि उसका पसंदीदा हिस्सा क्या था। यह आपके बच्चे की समझ के कौशल को बढ़ाएगा, और एक पारिवारिक गतिविधि को पढ़ने देगा। 
और उसे ये गतिवधि कुशल वक्ता भी बनाएगा। 

READ DAILY 

एक बच्चे की रात-समय की दिनचर्या के हिस्से के रूप में एक साथ किताबें पढ़ना यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चे पढ़ने को आराम से जोड़ दें। बच्चे किसी ऐसे शब्द को भी इंगित कर सकते हैं जिससे वे परिचित हों और उन्हें पढ़कर सुनाया जाए। या उनको मनोरंजन लगे पढ़ना बोझ न लगकर मजेदार लगने लगे। 
उन बच्चों के लिए जिन्होंने अभी तक पढ़ना शुरू नहीं किया है, कहानी के बारे में सवाल पूछते हैं जैसे कि ‘आपको क्या लगता है कि आगे क्या होने वाला है?’ उन्हें कहानी संरचनाओं से परिचित कराने में मदद करेगा।

USE DRAMA AND PLAY WAY METHOD

बच्चों को अभिनय से ज्यादा कुछ पसंद नहीं है और विभिन्न भूमिकाओं को आजमाते हैं। यदि आपका बच्चा एक अनिच्छुक पाठक है, तो उन्हें एक काल्पनिक कहानी से एक चरित्र को खेलने के लिए प्रोत्साहित करना, संवाद के साथ पूरा करना, उन्हें एक पाठ पढ़ने के लिए प्रेरित करने में मदद कर सकता है।

VISIT TO LOCAL LIBRARY OR BOOK FAIRS ETC.

लाइब्रेरी कार्ड से रीडिंग का मज़ा आसान हो सकता है। अपने स्थानीय सार्वजनिक पुस्तकालय में चयन का लाभ उठाकर अपने बच्चे को एक पुस्तक लेने दें जो उसका ध्यान आकर्षित करती है।
साथ ही बुक फेयर आदि स्थानों पर बच्चों को ले जाना चाहिए उससे बच्चों को किताबों से प्यार बढ़ता है और तरह तरह की किताबें उनका ध्यान आकर्षित करती हैं ,जिससे रीडिंग हैबिट्स का डेवलपमेंट होता है।

SHARE YOUR READING EXPERIENCES 

अपने पढ़ने के अनुभव साझा करें। हो सके तो बच्चों के सामने ही  सहयोगियों, मित्रों और छात्रों के साथ साझा करें। उन्हें बताएं कि आप क्या पढ़ रहे हैं, आपने इन ग्रंथों से क्या हासिल किया है या सीखा है, आप क्या सलाह देते हैं। एक शिक्षक के रूप में, मैंने बहुत जानबूझकर और नियमित रूप से अपने छात्रों को बताया कि मैं क्या पढ़ रहा था, मैं कहाँ पढ़ता था, मैं उन किताबों में लाया जिन्हें मैंने पढ़ा, मैंने उनके लिए पैसेज पढ़े, मैंने मूक पढ़ने के दौरान पढ़ा, मैंने उन्हें बताया कि पढ़ने से मेरे जीवन में क्या क्या सकरात्मक परिवर्तन आयें हैं। 

MAKE CONNECTION BETWEEN READING AND OTHER ISSUES 

पढ़ने और अन्य मुद्दों के बीच संबंध बनाएं।जैसे पूस की रात कैसे आज भी उतनी ही समकालिक है जितनी उस समय थी। या कैसे भगत सिंह के विचार आज भी उतने ही क्रन्तिकारी है जितने पहले थे। जैसे कबीर बुलंद आवाज में उस समय के ऊंच नीच हिन्दू मुस्लिम विषयों को अपने दोहे में पिरो के इन का पुरजोर विरोध करते थे। वो आज भी उतना ही जरुरी है। 
अगर किताबों से दोस्ती कम उम्र में ही हो जाये तो वो जीवन भर मदद करती है ,प्राय देखा गया है जो लोग अधिक पढ़ते हैं व अधिक सामाजिक होते हैं तथा कुशल वक्ता भी होंतें है। समाज भी ऐसे लोगों का अधिक सम्मान  करता है।

TELL THEM IMPORTANCE OF READING

बच्चों को पढ़ने  के लाभों से भी अवगत कराना बहुत आवश्यक है। ताकि वे जान सके की पठन कौशल के विकास से क्या सकरात्मक परिवर्तन आएगा उनकी लाइफ में। 
इसके लिए महापुरषों का उदाहरण दिया जा सकता है जैसे गाँधी जी का ,स्वामी विवेकानंद  जी का ,अब्दुल कलाम जी का आदि। ताकि इनको जानकर इनके कुछ गुण बच्चे अपने अंदर लाने का प्रयास करें। 

START FROM VERY EARLY AGE OF CHILD

रीडिंग हैबिट्स बच्चों के EARLY AGE में ही शुरू कर देनी चाहिए अर्थात जब बचा 2 -3 साल का होता है तब से ही बच्चों को कहानियाँ मधुर संगीत आदि सुनाना शुरू कर देना चाहिए।
बच्चे शुरू में नक़ल करके ही सीखते हैं अथार्त हम उन्हें जितना अधिक एक्सपोज़र देंगे वे उतनी जल्दी सीखेंगे और ये शुरवाती कार्य बाद में उनके पठन कौशल विकास में महत्पूर्ण भूमिका निभाएगा। 

अतः हमे अपने बच्चों के अंदर पठान कौशल का विकास अवश्य करना चाहिए। कृपया कम्मेन्ट्स में बतायें आप सहमत हैं या नहीं।