CBSE CLASS 12TH RESULT 2019 एक शिक्षक की नजर से।

CBSE CLASS 12TH RESULT 2019 

 CBSE  ने 12वीं के रिजल्ट जारी कर दिए हैं। सभी जोन के परिणाम एक साथ जारी किए गए हैं। देश में कुल 83.4% छात्र पास हुए हैं तिरुवअनंतपुरम में सबसे ज्यादा 98.2% छात्र पास हुए हैं। इसके बाद चेन्नई 92.93% और दिल्ली में 91.87% छात्र पास हुए हैं। वहीं विदेशों में 95.43% छात्र पास हुए हैं। लड़को की पास % 79. 04 रही वहीँ लड़कियां फिर बजी मरती हुई दिखी उनमें 88. 7 % छात्रायें पास हुईं , ट्रांसजेंडर की पास % 
88.33 रही। कुल 12,87,359 छात्र परीक्षा में बैठे थे। उनमे 7,48,498 लड़के थे व 5,38,861 लड़कियां थी।  

कुल 17693 छात्रों ने 95 % से अधिक अंक प्राप्त किये हैं ,जो 7. 82 % है कुल छात्रों में जो परीक्षा में सम्मलित हुए थे

इन छात्रों का भविष्य क्या है ??


परिणाम अच्छे आएं है इस साल सभी छात्रों अभिवावकों और अध्यापकों को बधाई। पर अब सवाल उठता है आगे क्या ? क्या हमारे पास पर्याप्त मात्रा में डिग्री कॉलेज उपलब्ध हैं जो इन सभी छात्रों को एडमिशन दे सकें।

दिल्ली यूनिवर्सिटी एडमिशन इनफार्मेशन 


दिल्ली विश्वविद्यालय 15 मई, 2019 से DU 2019 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की संभावना है। हालाँकि, St.Stephen’s College के लिए DU प्रवेश 2019 का आवेदन पत्र 6 मई, 2019 को जारी किया जाएगा। जो उम्मीदवार किसी भी स्नातक में दाखिला लेने के इच्छुक हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों द्वारा दिए जाने वाले बीए, बी.कॉम और बी.एससी जैसे कार्यक्रम डीयू प्रवेश 2019 के ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने और जमा करने होंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय 2019 प्रवेश के आवेदन फॉर्म 15 मई से उपलब्ध होंगे। 2019. डीयू प्रवेश पत्र 2019 जमा करने की अंतिम तिथि विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा अधिसूचित की जाएगी। डीयू प्रवेश 2019 मेरिट और प्रवेश परीक्षा दोनों के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रवेश 2019 की%मेरिट सूची दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘बेस्ट ऑफ फोर’ गणना के माध्यम से बनाई जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज डीयू 2019 में प्रवेश के लिए 11 कटऑफ के करीब जारी करेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय से संबद्ध 82 कॉलेजों में 56,000 सीटों की पेशकश करता है, जिनमें से कुछ कॉलेज स्वायत्त हैं। डीयू 2019 प्रवेश में भाग लेने वाले उम्मीदवार मेरिट-आधारित और प्रवेश आधारित दोनों कार्यक्रमों के लिए एक ही आवेदन पत्र पर आवेदन कर सकते हैं


यहाँ कुल 56000 ही छात्रों को दाखिला दिया जा सकता है परन्तु कुल 1073657 छात्रों ने सीबीएसई की परीक्षा पास की है। अभी तो राज्यों के बोर्डों के छात्र इसमें शामिल नहीं है

अगर हम पुरे भारत के डिग्री colleges की सीटों की भी बात करैं तो वह काफी कम ही बैठती हैं। 

छात्रों का क्या कसूर ?


दिल्ली यूनिवर्सिटी की एडमिशन कट ऑफ इस साल और ऊपर जाने की आशंका है ,अब सवाल उठता है 85 % से कम अंक प्राप्त करने वाले बच्चे कहाँ जायेंगे ?

क्या उनको उच्च शिक्षा प्राप्त करने का हक़ नहीं है?

इन सब सवालों को हम लगों ने दबा दिया है,और इसके बदले में हम अपने बच्चों को ही pressurise कर रहें हैं की वो 90 %-95 % नंबर लायें और एजुकेशन बस एक नंबर गेम बन के रह गया है। कोचिंग इंस्ट्यूट अरबों का बिज़नेस मार्किट बन चूका है। 

पर इन सब में एजुकेशन का असली उद्देश्य कहीं खो गया है। क्यों हम सिखने पर खुश नहीं होते जब तक बच्चा उस सीखे हुए को नंबर में कन्वर्ट नहीं कर पाता ,सीखना  केवल रटना और नंबर लाने तक सीमित  हो चूका है।
जबकि सीखना बहुत कुछ है केवल नंबर नहीं है। 

अभी हाल में हुए कुछ सर्वे बतातें हैं की भारत केअधिकतर  ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट छात्र इस काबिल ही नहीं है की वो उस योग्यता के अनुसार नौकरी पा सकें। 

क्रिएटिविटी को तो हम छात्र के बचपन में ही ख़तम कर देतें हैं ,जब वो बुक के अलावा कुछ और उत्तर देता है। क्यों जो बुक में लिखा है केवल वही सही है ? क्या ऐसा नहीं हो सकता जो नया उत्तर आया हो वो उससे से भी बेहतर हो जो बुक में लिखा हुआ है। बिलकुल हो सकता है परन्तु हम क्या करते हैं वही लिखो जो बुक में लिखा है। छात्र फिर पूर्ण जिंदगी बुक को ही आधार मान के ज्ञान हासिल करता है ,पर होना ये चाहिए हमे समस्या के विभिन्न उत्तरों को खोजना चाहिए। 

इंटेलिजेंस  =नंबर हो चुके मतलब जो अधिक नंबर लाता है वो इंटेलीजेंट और जो कम लाता है वो बुद्धू,पर एक संगीतकार या एक डांसर या कोई खिलाडी कम इंटेलीजेंट होते हैं बोलो ? नहीं न फिर भी हम क्यों भेड़चाल का शिकार हैं ?इसका प्रमुख कारण  है हमे अपने बच्चो के भविष्य डर सताता है ,अगर नंबर नहीं लाएगा तो फलां कॉलेज में एडमिशन कैसे होगा ,फलां कोर्स कैसे कर पायेगा आदि। पर होना ये चाहिए बच्चे की रूचि व क़ाबलियत के अनुसार ही अपेक्षा रखनी चाहिए। 


नंबर लाना शान का विषय भी है जब से 12th का cbse रिजल्ट आया है जिनके अच्छे नंबर आये हैं उनके माता पिता रिस्तेदार सब सोशल मीडिया पर उसका प्रचार कर रहें हैं ,वैसे ये गलत भी नहीं है ,achievement का प्रचार करना तो बनता ही है। पर 50 % नंबर ला के पास होने वालें भी तो अचीवर हैं ,उनके अभिभावकों को भी शान से दिखाने चाहिए।

सरकार का फेलियर है की वो प्रत्येक छात्र को उच्च शिक्षा प्रदान नहीं कर पा रही उसके लिए हमे अपने बच्चों को दोषी नहीं ठहरना चाहिए बल्कि सरकारों से ये डिमांड करनी चाहिए की प्रयाप्त मात्रा में स्कूल कॉलेजेस बनाये ताकि काम अंक प्राप्त करने वाला छात्र भी एडमिशन पा सके तथा कोई छात्र खुद को हीन न समझे केवल इसलिए की वो कुछ नंबर कम लाया है। 

solution 


इन सब का सलूशन ये हो सकते हैं 
हमें सर्वप्रथम कॉलेजेस की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि हर वो बच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके जो करना चाहता है ,साथ ही quality ऑफ़ education पर भी जोर देना चाहिए। 

शिक्षकों की ट्रेनिंग में कुछ बदलाव की आवश्यकता है ,शिक्षकों के अंदर से इस भावना को निकालना पड़ेगा की उसे सब आता है। जबकि इस भावना को समावेश करना पड़ेगा जिसमें वो माने छात्र उससे भी बेहतर हो सकता है उत्तर का अलग होना गलत नहीं है। 

शिशकों की क़ाबलियत का पैमाना भी छात्रों के नंबर हो गया है जो अत्यंत दुःखद है ,शिक्षा के मैन उद्देश्य लर्निंग है पर यहाँ जोर नम्बरों पर आ गया है। अतः शिक्षक भी पुर जोर तरीके से लग जाता है उसकी क्लास का हर बच्चा अव्वल आये ,अब आप खुद सोचो क्या शिक्षक स्वयं ये नहीं जानता की हर छात्र अव्वल नहीं आ सकता फिर भी लगा हुआ है सबको अव्वल बनाने में। 

छात्रों की रूचि को सम्मान देने की आवश्यकता है ,अंत में ये जीवन छात्र का है पेरेंट्स और शिक्षक उसके जीवन को अपने अनुसार नहीं चला सकते। अगर कोई छात्र डांस में ही अधिक रूचि लेता है तो क्या फायदा उसे डॉक्टर बनाके। यहाँ ये भी बताना आवश्यक है की ऐसे फॉर्मल स्कूल व् कॉलेजेस की बहुत कमी है हमारे देश में जो ऐसे courses के लिए हों। जरुरत है डांस ,संगीत,स्पोर्ट्स,आदि के अधिक से अधिक फॉर्मल मान्यता प्राप्त स्कूल व कॉलेजेस बनायें जायें। जैसे छात्र अगर डांस में अच्छा है तो उसके मार्क्स उसका डांस तय करेगा न की उसकी मैथ्स साइंस का ज्ञान। और जब छात्र एक बैचलर ऑफ़ डांस करके निकलेगा तो ये माना जायेगा ये भी उतना ही मेहनती है जितना कोई बैचलर ऑफ़ साइंस वाला।


लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से निकलने की आवश्यकता है ,क्योंकि अब छात्र केवल क्लर्क नहीं बनना चाहता न ही अब शिक्षा उसे केवल क्लर्क बनाना चाहती है ,परन्तु कहीं न कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था आज भी लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित दिखती है जिसे बदलने की अत्यंत आवश्यकता है। 


अभिवकों को भी शिक्षित करने की आवश्यकता है की एजुकेशन केवल नंबर गेम नहीं है ,पुरे विश्व में भारत के छात्र ही सबसे जायदा आत्महत्या करते हैं,इसका एक कारण अभिभावकों अति उच्च अपेक्षायें भी हैं क्या पता अभी जो छात्र 40 % नंबर ला के डांट खा रहा है एक दिन अपनी अच्छी लीडरशिप quality के कारण एक कामयाब बिजनेसमैन बन जाये। तो हमे बच्चों को अपमानजनक शब्द नहीं बोलने चाहिए जैसे तुम्हारा तो कुछ नहीं हो सकता,फलां के बच्चे को देखो 95 % लाया है ,तेरा फ्यूचर तो ख़राब है। आदि