- हिन्दी सहित्य

लिफ़ाफ़ा

लिफ़ाफे में लिफ़ाफ़ा

लिफाफा देख कर खत का न ज़ायज़ा लेना,
बन्द लिफ़ाफे में क़यामत भी हो सकती है,
जो भूल जाते हो तुम उसको,
क्या पता उसकी आस तुम्ही से जुड़ी ही सकती है।

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पैबंद देख हँसी के लगाए चेहरे पर न जायज़ा लेना
उसकी मजबूरी हो सकती है,
हवाओं से भांप न लेना किसीको
क्या पता परतों के पीछे कितने गम दावत उड़ाते हो।।।

By पद्मजा राघव

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